मैं एक घाव है जो जरा सा छूह दो तो दुखता है जब तुम्हारा कोई अपमान कर देता है तो कौन सी चीज दुखती है तुम्हारे भीतर ?
क्या कोई तुम्हारा अपमान करता है क्या इसलिए पीड़ा होती है ? इससे क्या पीड़ा होगी उसने अपनी जवान खराब की, तुम्हारा क्या बिगड़ा ? अगर अहंकार न हो तो तुम्हे दया आयेगी उसपर, मगर अगर अहंकार है तो छिद जायेगी तलवार की तरह गाली, अहंकार दुखता है, अहंकार की ही आकांक्षा है कि धन हो, पद हो, प्रतिष्ठा हो, अहंकार दौड़ाता है और सिवाए दुख के, धन, पद, और प्रतिष्ठा की दौड़ में और कुछ भी हाथ लगता नही ।
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